5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंची GDP।

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देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में धीमी पड़कर 5 प्रतिशत रही. एक साल पहले इसी तिमाही में वृद्धि दर आठ प्रतिशत थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जीडीपी दर पहली तिमाही में 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी पर पहुंच गई. जो 6 साल में इसका सबसे निचला स्तसर है. आपको बता दें कि अधिकांश संकेतक कमजोर घरेलू मांग और सुस्त निवेश माहौल की ओर इशारा कर रहे थे. ऐसे में पहले से ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में और घटने की आशंका जताई जा रही थी…इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने 28 अगस्त को कहा था कि चालू वित्त वर्ष में मंद वृद्धि वाला लगातार तीसरा साल होगा.

इसने इसके लिए मुख्य रूप से उपभोग की मांग में कमी, मॉनसून में देरी, विनिर्माण में गिरावट और निर्यात को प्रभावित करने वाले वैश्विक व्यापार में मंदी को जिम्मेदार ठहराया है. इसके अलावा अन्य फर्मों ने भी समान रूप से अर्थव्यवस्था के नकारात्मक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने वित्त वर्ष 2020 में वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने की बात कही है…

बता दें कि कुछ दिन पहले गोल्डमैन सैक की रिपोर्ट में कहा गया था कि मौजूदा मंदी जून 2019 तक 18 महीनों तक चली है. 2006 के बाद से यह सबसे लंबी अवधि है. इसने आगे कहा कि नीति निर्माताओं ने वर्तमान मंदी को कम करने के लिए काम किया है, मगर यह पहले की अपेक्षा कम कारगर साबित हुई हैं.

गौरतलब है कि सरकार ने 23 अगस्त को अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और निवेश बढ़ाने के उपायों की घोषणा की थी. इस दिशा में बैंकों की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकारी बैंकों को अग्रिम भुगतान के तौर पर 70 हजार करोड़ रुपये दिए जाने की घोषणा भी की गई थी.

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