मध्य प्रदेश का सियासी कोरोना

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जैसा कि हम सब को ज्ञात है कि पूरा विश्व कोरोना जैसी ममहमरी से मुकाबला कर रहा है और भारत उनमे से एक है लेकि हमारे देश के राज्य मध्य प्रदेश में अलग ही सियासी कोरोना चल रहा है वहाँ पर किसी को अपनी सत्ता बचाने का कोरोना हुआ था तो किसी को अपनी सत्ता वस्थापित करने का कोरोना हुआ था।पिछले 5-6 महीनों ने कांग्रेस अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार चला रही थी।अपने 115 विधायकों को लेकर कांग्रेस सत्ता में स्थापित लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता और केंद्र की कांग्रेस के मंत्री और अभी के अनुसार पूर्व मंत्री और सांसद “ज्योतिरादित्य सिन्धिया” ने कांग्रेस को छोड़ भजपा का दामन थाम लिया जिससे कांग्रेस के 6 मंत्री और कुल 26 विधयकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया और कांग्रेस को अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ा।ज्योतिरादित्य ने अपने बयान में कहा कि सेवाभाव से कांग्रेस में करना अब संभव नही। लेकिन एक बाटो साफ है। विकास की इस राजनीतिक सियासत में युवा नेताओ को नेतृव के लिए आगे लाना ओर उन्हें संतुष्ट करने राजनीतिक पार्टियों का कर्तव्य है लेकिन कांग्रेस इन सब चीज़ों से कोसो दूर है जिसका खामियाजा उसे मध्य प्रदेश में साफ भुगतना पड़ा है और शायद सिन्धिया जैसे कद्दकर नेता को गवाने के बाद उसे आगे भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। लेकिन भाजपा ने अपना बहुमत साबित करके एक बार फिर अपनी सत्ता मध्य प्रदेश में स्थापित कर दी है।ओर सिन्धिया के पार्टी में होने का फायदा भाजपा को आगे भी मिलता रहेगा।

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