जलवायु परिवर्तन से बंजर हुई भूमि फिर बनेगी उपजाऊ।

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जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक समस्या बनाकर उभरा है। इससे सबसे अधिक नुकसान उपजाऊ जमीन को हुआ है।

करोड़ो हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई है। इस समस्या से निजात के लिए सरकार चिंतित है और इससे निपटने के लिए उचित कदम उठा रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और अन्य कारणों से बंजर हुई 2.6 करोड़ हेक्टेयर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 2030 तक इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह ग्रेटर नोएडा मार्ट में संयुक्त राष्ट्र की कांफ्रेंस ऑफ पार्टी (कॉप-14) की बैठक को संबोधित करते हुए कहा।

इस  बैठक में सौ से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। यह आयोजन जलवायु परिवर्तन से बंजर हो रही भूमि को बचाने के उपाय तलाशने के लिए हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2030 तक 2.1 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के अपने लक्ष्य को बढ़ाकर अब 2.6 करोड़ हेक्टेयर करने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि 2015 और 2017 के बीच भारत में पेड़ और जंगल के दायरे में आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। मोदी ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए उपायों का प्रस्ताव रख कर प्रसन्नता महसूस कर रहा हूँ।

प्रधानमंत्री ने यूएनसीसीडी के नेतृत्व से वैश्विक जल कार्रवाई एजेंडा बनाने का आह्वान किया।
आगे उन्होंने कहा कि गर्म तापमान के चलते समुद्र स्तर में वृद्धि, असामान्य बारिश और तूफान और रेत के तूफान जैसे जलवायु परिवर्तनों के कारण भी उपजाऊ भूमि का नुकसान हो रहा है।

इसिलए जब हम बंजर भूमि को ठीक करते हैं, तो हम पानी की कमी को भी ठीक करते हैं। जल आपूर्ति में वृद्धि, जल पुनर्भरण को बढ़ाना, जल प्रवाह को धीमा करना और मिट्टी में नमी बनाए रखना, सभी एक समग्र भूमि और जल रणनीति के हिस्से हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को गर्व है कि वह भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए रिमोट सेंसिंग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहा है और उसे इस दिशा में अन्य मित्र देशों की मदद करने में खुशी हो रही है।

जलवायु परिवर्तन पर भारत बहुत संजीदा है और इससे निपटने का हर संभव उपाय कर रहा है। इसी के तहत प्रधानमंत्री लगातार अपील कर रहे हैं कि प्लास्टिक का उपयोग बंद किया जाय। इसी तरह जल संचयन पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

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