गोंडा सूकरखेत पसका का मुख्य पर्व सोमवार को साधु संतों के साथ भक्तों का शुरू हुआ रेला

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गोन्डा परसपुर सूकरखेत पसका का मुख्य पर्व एवं स्नान सोमवार को होगा।मेले में प्रतिवर्ष से इस बार श्रद्धालुओं में काफी इजाफा होने के संकेत हैं डेढ से दो लाख श्रद्धालु संगम के इस त्रिमोहानी घाट पर आस्था की डुबकी लगाएंगे। सबसे पहले महीनों सें तट पर तप कर रहे सैकड़ों साधु- संतों का जत्था पावन सरयू में स्नान करेगा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन की तरफ से कथित घाट के समीप नदी में बैरीकेटिंग कराई गयी है।

संगम मेले में अपराध नियंत्रण एवं श्रद्धालुओं के अपनो से बिछड़ने पर संगम कराने के लिए अस्थाई कोतवाली बनाया गया है। रविवार को सीओ जटाशंकर राव एवं परसपुर एसओ बृजानंद सिंह नें सूकरखेत संगम मेला पहुंच कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

नहीं होंगे प्राचीन वाराह देव के दर्शन सूकरखेत स्थित ग्राम पसका के त्रिमुहानी संगम को पुराण में वाराह क्षेत्र कहा गया है। ऐतिहासिक और पौराणिक उल्लेखों से इस क्षेत्र का विशेष महत्व माना जाता है। सरयू नदी के इस तट पर तपस्वी ऋषि गुरु नरहरि दास का आश्रम एवं उनके द्वारा निर्मित यहां एक प्राचीन वाराह देव का विशाल मंदिर भी है।

इस वर्ष भी गैर प्रान्तों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को मंदिर में प्राचीन वाराह देव के दर्शन नसीब नही होंगे। इस मंदिर से तकरीबन साढ़े तीन दशक पूर्व 17/18 जनवरी 1985 की रात्रि चोर वाराह देव के अष्टधातु की प्राचीन बेशकीमती मूर्ति मंदिर से चुरा ले गए। श्रद्धालुओं को अब नवीन सूकर रूप में वाराह देव की मंदिर में स्थापित मूर्ति के दर्शन ही नसीब होगें।

मेलार्थियों की हो सुरक्षासूकरखेत पसका मेले में आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं व्यवस्था चाक चौबंद किए जाने की मांग परसपुर नगर पंचायत के सभासद जगदीश सोनी सहित तमाम लोगों ने जिला प्रशासन से की है।
मेलें में जगह-जगह अलाव जलवाने, बिजली- पानी शुलभ कराए जाने की मांग की है।

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