उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री श्री सुनील बंसल जी से मिलकर भारत-बंद विषय पर चर्चा की।

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आचार्य श्री पं. पुलकित जी मिश्रा (कथक एवं आध्यात्मिक गुरू) और आलिंगन वैलफेयर सोसाइटी के संस्थापक ने उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री श्री सुनील बंसल जी से मिलकर भारत-बंद विषय पर चर्चा की।
उत्तर प्रदेश की दशा और दिशा का परिवर्तन करने को कटिबद्ध, यशस्वी, निष्ठावान, प्रखर समाजसेवी और समाज व राष्ट्र के प्रति निष्ठावान व्यक्तित्व के नाते उनके जन्मदिवस की अनन्त, असीम, असंख्य शुभम् कामनाएँ, हार्दिक बधाई, अभिनन्दन एवम् जन्मदिन की अग्रिम मांगलिक शुभेच्छाएँ दीं।

भारत एक सम्पन्न, अग्रणी व शक्तिशाली देश था, पिछले १००० साल तक मुगलों और अंग्रेजों की दासता एवम् अनेक सामाजिक बुराइयों के कारण जैसे जाति प्रथा, अंधविश्वास, अशिक्षा, निर्धनता आदि के कारण समाज कमजोर होता चला जा रहा है, अब एक नई प्रथा शुरू हुई है भारत बंद, आखिर कुछ सामाजिक व्यक्ति ऐसे क्यों विरोध जताते हैं।

आचार्य श्री पं. पुलकित मिश्रा जी के अनुसार सरकार की महंगाई को बढ़ाने वाली गलत नीतियों का विरोध करने के लिए पिछले दिनों कुछ राजनीतिक दलों तथा कुछ अन्य संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। जो भी सरकार सत्ता में होती है, अगर वह गलत फैसले लेकर जनता की परेशानी का सबब बनती है, तो उसका विरोध जरूर होना चाहिए, लेकिन भारत बंद करने से उन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जिन्होंने महंगाई के लिए गलत फैसले लिए हैं।

फर्क सिर्फ आम आदमी को ही पड़ता है, वह आम आदमी जो पहले ही कमरतोड़ महंगाई से परेशान है, क्योंकि जब भी भारत बंद होता है, तो इससे देश को करोड़ों का नुकसान हो जाता है, जिसकी भरपाई किसी भी राजनीतिक पार्टी के सत्ताधारी लोग नहीं करते हैं, बल्कि उसकी भरपाई टैक्सों के रूप में आम जनता से ही की जाती है।

भारत बंद का सबसे ज्यादा फर्क गरीब लोगों पर पड़ता है, जो दिनभर दिहाड़ी लगाकर या अपना कोई छोटा काम करके अपने घर-परिवार का खर्चा चलाते हैं। इसलिए कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए महंगाई का विरोध इस तरह से होना चाहिए, जिससे आम जनता को कोई परेशानी न हो, बल्कि उन लोगों को परेशान किया जाना चाहिए, जिन्होंने महंगाई बढ़ाई है।

यद्यपि जिन्होंने महंगाई बढ़ाई है, वे ए सी कमरों में बैठकर टीवी पर बंद का सीधा प्रसारण देख रहे होंगे। काम ऐसे किए जाने चाहिए कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

आज भारत में इन सभी संवेदनशील विषयों ने सरकार व समाज दोनों का ध्यान गंभीरता से आकर्षित किया है। अनेक सामाजिक संगठन, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन तथा शीघ्रतिशीघ्र सामाजिक विषमताओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

“सबका साथ सबका विकास” सम्पूर्ण समाज में आत्मीयता व भाईचारा उत्पन्न कर सकेगा और आगामी छः सात वर्षों में भारत में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के साथ विकास की उज्ज्वल धारा बहेगी जो सभी सामाजिक कठिनाइयों को दूर करने में सफल होगी, ऐसा विश्वास किया जा सकता है।

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